कुछ लोगों को हमेशा सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती है लेकिन इनमें से ज्यादातर मामले साइनोसाइटिस यानी साइनस के होते हैं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह क्या है? दरअसल, हमारी खोपड़ी में बहुत-सारी कैविटीज़ (खोखले छेद) होती हैं। ये हमारे सिर को हल्का बनाए रखने और सांस लेने में मदद करती हैं। इन छेदों को साइनस कहते हैं। अगर इन छेदों में बलगम भर जाती है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इस समस्या को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। आम बोलचाल में इसे साइनस भी कहा जाता है।
हमारे चेहरे में कई जगहें ऐसी होती हैं, जो पूरी तरह से खोखली होती हैं। नाक, मस्तिष्क और आंखों के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद इन खोखली जगहों को ही साइनस कहते हैं। जब इन खोखली जगहों यानी साइनस में बाधा आती है तो बलगम आसानी से नहीं निकाल पाता। इस स्थिति को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। साइनस (Sinus) के मरीजों में सिर व चेहरे में भारीपन ,आंखों से पानी आना ,नाक बंद रहना व मुंह से सांस लेना और खराटे जैसी समस्या देखी गई हैं।
हमारे चेहरे में कई जगहें ऐसी होती हैं, जो पूरी तरह से खोखली होती हैं। नाक, मस्तिष्क और आंखों के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद इन खोखली जगहों को ही साइनस कहते हैं। जब इन खोखली जगहों यानी साइनस में बाधा आती है तो बलगम आसानी से नहीं निकाल पाता। इस स्थिति को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। साइनस (Sinus) के मरीजों में सिर व चेहरे में भारीपन ,आंखों से पानी आना ,नाक बंद रहना व मुंह से सांस लेना और खराटे जैसी समस्या देखी गई हैं।
हर साल बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आते हैं या कहें कि हर साल इसके नए मामले आते हैं। जिन लोगों को एलर्जिक साइनस होता है, उन्हें पोलन सीजन और सर्दियों में स्मॉग होने पर समस्या बढ़ने का खतरा रहता है। पहले जुकाम और प्रदूषण की वजह से गले में खिचखिच पैदा होती है। इसी के साथ नाक बंद होना, नाक बहना और बुखार जैसी शिकायतें होने लगती हैं। अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें तो ये एक्यूट साइनस हो सकता है। अगर यह समस्या बार-बार होने लगे या तीन महीने से ज्यादा समय तक बनी रहे तो यह क्रॉनिक साइनस हो सकता है।
क्यों होता है?
सांस लेने में रुकावट, नाक की हड्डी का बढ़ना और तिरछा होना, एलर्जी होना इसकी आम समस्या है यानी किसी भी कारण से साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में अगर रुकावट आ जाती है तो साइनस होता है। इसके अलावा कई बार खोखले छेदों में बलगम भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं। साथ ही, इन्फेक्शन के कारण साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। इस वजह से सिर, माथे, गालों और ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है। यह बीमारी खराब लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होती लेकिन जो लोग फील्ड जॉब में होते हैं यानी जो ज्यादा समय पल्यूशन में रहते हैं या फिर लकड़ी इंडस्ट्री आदि प्रफेशन से जुड़े होते हैं, उनको साइनस होने का खतरा ज्यादा होता है।
सांस लेने में रुकावट, नाक की हड्डी का बढ़ना और तिरछा होना, एलर्जी होना इसकी आम समस्या है यानी किसी भी कारण से साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में अगर रुकावट आ जाती है तो साइनस होता है। इसके अलावा कई बार खोखले छेदों में बलगम भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं। साथ ही, इन्फेक्शन के कारण साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। इस वजह से सिर, माथे, गालों और ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है। यह बीमारी खराब लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होती लेकिन जो लोग फील्ड जॉब में होते हैं यानी जो ज्यादा समय पल्यूशन में रहते हैं या फिर लकड़ी इंडस्ट्री आदि प्रफेशन से जुड़े होते हैं, उनको साइनस होने का खतरा ज्यादा होता है।
साइनस (साइनोसाइटिस) के लक्षण (Sinusitis Symptoms)।
ऐसे मरीजों के गले में रेशा गिरता रहता है। साइनस के मरीजों को 10-12 छींके, नाक से पानी आना ,कानों में भारीपन व आवाज भी आ सकती है। इसके अलावा साइनोसाइटिस के मरीजों को असमय बाल सफेद होना व उनका झड़ना जैसी प्रॉबल्म की शिकायत रहती हैं। साइनोसाइटिस यानी साइनस ऐसी ही बीमारी है। थोड़ी सी सावधानी इसके लक्षण पहचानने और इसके इलाज में भरपूर मदद करेगी। साइनस के मरीज में रेशा सिर में एकत्र हो जाता है, जिससे सिर में दर्द, आंखों में भारीपन व पानी निकलना जैसे लक्षण दिखाई देते है। अगर रेशा मुंह व गालों में एकत्र हो तो चेहरे पर सूजन, भारीपन व दर्द होता है। ऐसे मरीजों के दांत व मसूड़ों में भी भारीपन और दर्द रहता है। इसमें मरीज अकसर कब्ज का शिकार रहता है। अकसर लोग गलत खानपान पर इसका दोष मढ़ कर निश्चिंत हो जाते हैं, जबकि ये साइनस का संकेत भी हो सकता है। इसके कुछ संकेत चेहरे में अलग-अलग जगहों पर दर्द के रूप में भी मिलते हैं।
ऐसे मरीजों के गले में रेशा गिरता रहता है। साइनस के मरीजों को 10-12 छींके, नाक से पानी आना ,कानों में भारीपन व आवाज भी आ सकती है। इसके अलावा साइनोसाइटिस के मरीजों को असमय बाल सफेद होना व उनका झड़ना जैसी प्रॉबल्म की शिकायत रहती हैं। साइनोसाइटिस यानी साइनस ऐसी ही बीमारी है। थोड़ी सी सावधानी इसके लक्षण पहचानने और इसके इलाज में भरपूर मदद करेगी। साइनस के मरीज में रेशा सिर में एकत्र हो जाता है, जिससे सिर में दर्द, आंखों में भारीपन व पानी निकलना जैसे लक्षण दिखाई देते है। अगर रेशा मुंह व गालों में एकत्र हो तो चेहरे पर सूजन, भारीपन व दर्द होता है। ऐसे मरीजों के दांत व मसूड़ों में भी भारीपन और दर्द रहता है। इसमें मरीज अकसर कब्ज का शिकार रहता है। अकसर लोग गलत खानपान पर इसका दोष मढ़ कर निश्चिंत हो जाते हैं, जबकि ये साइनस का संकेत भी हो सकता है। इसके कुछ संकेत चेहरे में अलग-अलग जगहों पर दर्द के रूप में भी मिलते हैं।
- सिर में दर्द और भारीपन।
- आवाज में बदलाव।
- बुखार और बेचैनी।
- आंखों के ठीक ऊपर दर्द।
- दांतों में दर्द।
- सूंघने और स्वाद की शक्ति कमजोर होना।
- बाल सफेद होना।
- नाक से पीला लिक्विड गिरने की शिकायत।
कैसे जानें कि साइनस है?
जुकाम अक्सर अपना पूरा वक्त लेकर ही ठीक होता है। यह ज्यादा-से-ज्यादा एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। हालांकि तीसरे-चौथे दिन से जुकाम की तीव्रता कम होने लगती है। लेकिन अगर जुकाम एक या दो दिन में ही बहते-बहते अचानक रुक जाए या अपने आप ठीक हो जाए तो हो सकता है कि जुकाम बाहर न निकलकर अंदर ही जम गया है जोकि आगे चलकर साइनस बन सकता है। अगर जुकाम करीब एक हफ्ता रहे और अपना पूरा टाइम लेकर ठीक हो तो मरीज को आगे जाकर साइनस होने का खतरा नहीं होता क्योंकि बलगम आदि नाक के जरिए बाहर निकल जाता है लेकिन अगर बार-बार जुकाम हो और वह दो-तीन दिन में अपने आप ही ठीक हो जाए, बहे नहीं या दवा लेकर उसे रोक दिया जाए तो वह साइनस बन जाता है।
जुकाम अक्सर अपना पूरा वक्त लेकर ही ठीक होता है। यह ज्यादा-से-ज्यादा एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। हालांकि तीसरे-चौथे दिन से जुकाम की तीव्रता कम होने लगती है। लेकिन अगर जुकाम एक या दो दिन में ही बहते-बहते अचानक रुक जाए या अपने आप ठीक हो जाए तो हो सकता है कि जुकाम बाहर न निकलकर अंदर ही जम गया है जोकि आगे चलकर साइनस बन सकता है। अगर जुकाम करीब एक हफ्ता रहे और अपना पूरा टाइम लेकर ठीक हो तो मरीज को आगे जाकर साइनस होने का खतरा नहीं होता क्योंकि बलगम आदि नाक के जरिए बाहर निकल जाता है लेकिन अगर बार-बार जुकाम हो और वह दो-तीन दिन में अपने आप ही ठीक हो जाए, बहे नहीं या दवा लेकर उसे रोक दिया जाए तो वह साइनस बन जाता है।
साइनस का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic Medicine For Sinus/Sinusitis)
सुबह उठकर गाय के देसी घी की नाक में दो-दो बूदें डालने से साइनस से छुटकारा मिलता है। साथ ही इससे उम्र से पहले सफेद बाल, हेयर फॉल बंद और दिमाग तेज होता है।
सुबह उठकर गाय के देसी घी की नाक में दो-दो बूदें डालने से साइनस से छुटकारा मिलता है। साथ ही इससे उम्र से पहले सफेद बाल, हेयर फॉल बंद और दिमाग तेज होता है।
काढ़ा।
काली मिर्च का काढ़ा दिन में दो बार सुबह-शाम लेने से काफी आराम मिलता है। इसे गुनगुनी चाय की तरह धीरे-धीरे पिएं। काढ़े में 5 काली मिर्च, 10 तुलसी की पत्ती, 3 ग्राम कुटा हुआ अदरक और एक कप पानी लें। सारी सामग्री को पानी में डाल कर तब तक उबालें, जब तक ये आधा ना रह जाए।
काली मिर्च का काढ़ा दिन में दो बार सुबह-शाम लेने से काफी आराम मिलता है। इसे गुनगुनी चाय की तरह धीरे-धीरे पिएं। काढ़े में 5 काली मिर्च, 10 तुलसी की पत्ती, 3 ग्राम कुटा हुआ अदरक और एक कप पानी लें। सारी सामग्री को पानी में डाल कर तब तक उबालें, जब तक ये आधा ना रह जाए।
साइनस का घरेलू उपचार के लिए नम गर्मी (Moist heat)।
आप विशेष रूप से अपने चेहरे और नाक के आसपास की त्वचा को नम रख सकते है। उसके लिए आप अपने चेहरे पर गर्म पानी की भाप ले सकते हो, गर्म पानी में तौलिया डुबोकर उससे अपने चेहरे को ढक ले। आपको एक दिन में 5 से 10 मिनिट के लिए यह प्रयोग नियमित रूप से करना होगा।
आप विशेष रूप से अपने चेहरे और नाक के आसपास की त्वचा को नम रख सकते है। उसके लिए आप अपने चेहरे पर गर्म पानी की भाप ले सकते हो, गर्म पानी में तौलिया डुबोकर उससे अपने चेहरे को ढक ले। आपको एक दिन में 5 से 10 मिनिट के लिए यह प्रयोग नियमित रूप से करना होगा।
तरल पधार्थो का अधिक सेवन (Fluid maximization)।
अगर आप साइनस की समस्या से पीड़ित है तो इसका मतलब यह है की आपके शरीर में पानी की कमी है। आपको जल्दी ही इसे दूर करना होगा, वरना आपके सामने एक खतरनाक स्थिति होगी। इसके लिए आपको पर्याप्त पानी रोज पीना चाहिए नहीं, तो एक बड़ी मुसीबत हो सकती है। साथ ही साथ साँस लेने की मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
अगर आप साइनस की समस्या से पीड़ित है तो इसका मतलब यह है की आपके शरीर में पानी की कमी है। आपको जल्दी ही इसे दूर करना होगा, वरना आपके सामने एक खतरनाक स्थिति होगी। इसके लिए आपको पर्याप्त पानी रोज पीना चाहिए नहीं, तो एक बड़ी मुसीबत हो सकती है। साथ ही साथ साँस लेने की मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
साइनस का घरेलू उपचार के लिए भाप स्नान (Steam bath)।
आपके शरीर का भाग कठोर होने की वजह से साइनस की समस्या बन गई है। इसकी मदद के लिए एक ही रास्ता है, कि आप उस वातावरण को नम रखे आप एक गर्म भाप स्नान कर सकते है। आपको अच्छा लाभ होगा आप पार्लर में स्पा के लिए जा सकते है या घर पर ही भाप स्नान कर सकते है।
आपके शरीर का भाग कठोर होने की वजह से साइनस की समस्या बन गई है। इसकी मदद के लिए एक ही रास्ता है, कि आप उस वातावरण को नम रखे आप एक गर्म भाप स्नान कर सकते है। आपको अच्छा लाभ होगा आप पार्लर में स्पा के लिए जा सकते है या घर पर ही भाप स्नान कर सकते है।
पानी की कमी से बचें।
आपको साइनस की समस्या है तो यह जान लें कि आपके शरीर में पानी की भी कमी है। आपको जल्द ही इस समस्या से निजात पाना होगा, वरना गंभीर स्थिति पैदा हो जाएगी। इसके लिए आपको रोज खूब पानी पीना चाहिए। अल्कोहल, कैफीन, मीठे शरबत आदि पीने और स्मोकिंग करने से बचें। क्यों, क्या नुकसान।
आपको साइनस की समस्या है तो यह जान लें कि आपके शरीर में पानी की भी कमी है। आपको जल्द ही इस समस्या से निजात पाना होगा, वरना गंभीर स्थिति पैदा हो जाएगी। इसके लिए आपको रोज खूब पानी पीना चाहिए। अल्कोहल, कैफीन, मीठे शरबत आदि पीने और स्मोकिंग करने से बचें। क्यों, क्या नुकसान।
नमक का पानी (Salt Water)।
आमतौर पर नमक का उपयोग घर पर होता है, तो साइनस की समस्या के समाधान के लिए आप नमक और पानी से अपनी नाक धो सकते है। नमक नासिका से बेक्टीरिया और वायरस को दूर करने में सहायक होता है।
आमतौर पर नमक का उपयोग घर पर होता है, तो साइनस की समस्या के समाधान के लिए आप नमक और पानी से अपनी नाक धो सकते है। नमक नासिका से बेक्टीरिया और वायरस को दूर करने में सहायक होता है।
खारे पानी से कुल्ला (Gargling)।
घर पर साइनस की समस्या के इलाज के लिए कुल्ला भी एक अच्छा माध्यम है। इसे को हम खारे पानी से कुल्ला करना भी कह सकते है। आपको 10 मिनिट तक गर्म पानी और नमक के साथ कुल्ला शुरू करना है, अगर आपको आम सर्दी के प्रभाव में इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो यह एक अच्छा उपाय है। कुल्ले के माध्यम से यह काफी हद तक खत्म हो जायेगा। इसके प्रयोग से आप अपनी नाक के साथ अपने गले में भी अच्छी तरह से गर्माहट मिल जायेगी।
घर पर साइनस की समस्या के इलाज के लिए कुल्ला भी एक अच्छा माध्यम है। इसे को हम खारे पानी से कुल्ला करना भी कह सकते है। आपको 10 मिनिट तक गर्म पानी और नमक के साथ कुल्ला शुरू करना है, अगर आपको आम सर्दी के प्रभाव में इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो यह एक अच्छा उपाय है। कुल्ले के माध्यम से यह काफी हद तक खत्म हो जायेगा। इसके प्रयोग से आप अपनी नाक के साथ अपने गले में भी अच्छी तरह से गर्माहट मिल जायेगी।
नाक में खारी बूँद (Saline nose drops)।
नमक के पानी में इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते है जो काफी असरदार रहेगा नाक में बस आपको खारे पानी की कुछ बूंदे छोड़ने से साइनस की समस्या से राहत मिल जायेगी। यदि आप चाहते है तो फार्मेसी में इस तरह की की तरल दवाई मिल सकती है लेकिन यह घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। खारी बूँद लेने से आपको नाक की रूकावट खोलने और साइनस (sinus ke gharelu nuskhe) को कम करने में मदद मिलेगी।
नमक के पानी में इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते है जो काफी असरदार रहेगा नाक में बस आपको खारे पानी की कुछ बूंदे छोड़ने से साइनस की समस्या से राहत मिल जायेगी। यदि आप चाहते है तो फार्मेसी में इस तरह की की तरल दवाई मिल सकती है लेकिन यह घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। खारी बूँद लेने से आपको नाक की रूकावट खोलने और साइनस (sinus ke gharelu nuskhe) को कम करने में मदद मिलेगी।
नाक साफ़ करें (Try blowing nose)।
कई लोग शर्म से बचने के लिए नाक के अन्दर से निकलने वाला द्रव्य वापस अन्दर की ओर खींच लेते हैं। पर असल में यह एक खराब आदत है और आपके स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक है। अपने नाक के द्रव्य को जितना हो सके बाहर निकालें, जिससे आपको सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो और आपकी नाक बंद ना रहे। क्योंकि आप साइनस की समस्या से जूझ रहे हैं, अतः आपकी नाक में कभी कभी काफी मात्रा में गन्दगी जमा होगी। अतः अपनी नाक को जितनी बार हो सके साफ़ करने की कोशिश करें।
कई लोग शर्म से बचने के लिए नाक के अन्दर से निकलने वाला द्रव्य वापस अन्दर की ओर खींच लेते हैं। पर असल में यह एक खराब आदत है और आपके स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक है। अपने नाक के द्रव्य को जितना हो सके बाहर निकालें, जिससे आपको सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो और आपकी नाक बंद ना रहे। क्योंकि आप साइनस की समस्या से जूझ रहे हैं, अतः आपकी नाक में कभी कभी काफी मात्रा में गन्दगी जमा होगी। अतः अपनी नाक को जितनी बार हो सके साफ़ करने की कोशिश करें।
घर का वातावरण रखें साफ।
धूल, मिट्टी के महीन कण, पशुओं के बाल, फफूंद आदि हवा में रहने वाले ऐसे तत्व हैं, जिन्हें साइनस का बड़ा कारण माना जाता है। इसके लिए आप अपने घर में एयर प्यूरिफायर लगवाएं, जिससे आपके घर के अंदर वातावरण साफ बना रह सके। लेकिन हर महीने फिल्टर की सफाई जरूरी है। अपने पालतू जानवरों को घर से बाहर रखें। उनकी साफ-सफाई पर भी ध्यान दें। हफ्ते में एक बार वैक्यूम क्लीनर से घर की सफाई करवाएं।
धूल, मिट्टी के महीन कण, पशुओं के बाल, फफूंद आदि हवा में रहने वाले ऐसे तत्व हैं, जिन्हें साइनस का बड़ा कारण माना जाता है। इसके लिए आप अपने घर में एयर प्यूरिफायर लगवाएं, जिससे आपके घर के अंदर वातावरण साफ बना रह सके। लेकिन हर महीने फिल्टर की सफाई जरूरी है। अपने पालतू जानवरों को घर से बाहर रखें। उनकी साफ-सफाई पर भी ध्यान दें। हफ्ते में एक बार वैक्यूम क्लीनर से घर की सफाई करवाएं।
हल्दी और अदरक के जड़ की चाय (Turmeric and ginger root tea for treating sinus)।
अगर आप साइनस से तुरंत छुटकारा प्राप्त करना चाहते हैं तो हल्दी और अदरक की जड़ से बनी चाय का सेवन करें। हल्दी में कई औषधीय गुण होते हैं और इसमें मौजूद तत्व इसे जलनरोधी भी बनाते हैं, जिससे किसी भी तरह की एलर्जी (allergy) और चिडचिडेपन को दूर किया जा सकता है। अदरक की जड़ें नाक को खोलने में आपकी मदद करती हैं और अन्दर की गन्दगी को साफ़ करती हैं।
इसके लिए 1 इंच हल्दी और 1 इंच अदरक की जड़ लें। इन दोनों को मसलकर एक कप उबलते गर्म पानी में डाल दें तथा ऊपर से ढक्कन लगा लें। इसे 10 मिनट तक आंच पर रखें और फिर छान लें। इस चाय का सेवन करने से आपको साइनस के दर्द से छुटकारा प्राप्त हो जाएगा।
अगर आप साइनस से तुरंत छुटकारा प्राप्त करना चाहते हैं तो हल्दी और अदरक की जड़ से बनी चाय का सेवन करें। हल्दी में कई औषधीय गुण होते हैं और इसमें मौजूद तत्व इसे जलनरोधी भी बनाते हैं, जिससे किसी भी तरह की एलर्जी (allergy) और चिडचिडेपन को दूर किया जा सकता है। अदरक की जड़ें नाक को खोलने में आपकी मदद करती हैं और अन्दर की गन्दगी को साफ़ करती हैं।
इसके लिए 1 इंच हल्दी और 1 इंच अदरक की जड़ लें। इन दोनों को मसलकर एक कप उबलते गर्म पानी में डाल दें तथा ऊपर से ढक्कन लगा लें। इसे 10 मिनट तक आंच पर रखें और फिर छान लें। इस चाय का सेवन करने से आपको साइनस के दर्द से छुटकारा प्राप्त हो जाएगा।
सेब का सिरका (Apple cider vinegar for treating sinus)।
सेब का सिरका भी एक ऐसा उपचार है जो साइनस को ठीक करने में काफी अहम् भूमिका निभाता है। इसके लिए 2 चम्मच सेब के सिरके को आधा कप गर पानी, जो कि उबलता हुआ ना हो, के साथ मिश्रित करें। इसमें 1 चम्मच शहद भी मिलाएं। इस मिश्रण को गर्म रहते हुए पियें और आपको काफी फर्क नज़र आएगा।
आप सेब के सिरके का भरपूर लाभ उठाने के लिए इससे भाप भी ले सकते हैं। इसके लिए पानी और सेब के सिरके को बराबर मात्रा में मिश्रित करें और इससे भाप लें। यह मिश्रण संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया (bacteria) को ख़त्म करता है और आपको काफी आराम पहुंचाता है।
सेब का सिरका भी एक ऐसा उपचार है जो साइनस को ठीक करने में काफी अहम् भूमिका निभाता है। इसके लिए 2 चम्मच सेब के सिरके को आधा कप गर पानी, जो कि उबलता हुआ ना हो, के साथ मिश्रित करें। इसमें 1 चम्मच शहद भी मिलाएं। इस मिश्रण को गर्म रहते हुए पियें और आपको काफी फर्क नज़र आएगा।
आप सेब के सिरके का भरपूर लाभ उठाने के लिए इससे भाप भी ले सकते हैं। इसके लिए पानी और सेब के सिरके को बराबर मात्रा में मिश्रित करें और इससे भाप लें। यह मिश्रण संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया (bacteria) को ख़त्म करता है और आपको काफी आराम पहुंचाता है।
बाहरी इन्फेक्शन से करें बचाव।
प्रदूषण से बचाव के लिए जरूरी है। साइनस से पीड़ित कुछ लोगों की समस्या इससे काफी बढ़ जाती है। आप जब भी बाहर जाएं, मुंह पर मास्क लगाकर जाएं। आप एन-90 मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं अगर खुद कार चला रहे हैं तो शीशे बंद करके रखें और इस बात का ध्यान रखें कि आपकी कार का वेंटिलेशन सिस्टम सही तरह से काम कर रहा हो।
प्रदूषण से बचाव के लिए जरूरी है। साइनस से पीड़ित कुछ लोगों की समस्या इससे काफी बढ़ जाती है। आप जब भी बाहर जाएं, मुंह पर मास्क लगाकर जाएं। आप एन-90 मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं अगर खुद कार चला रहे हैं तो शीशे बंद करके रखें और इस बात का ध्यान रखें कि आपकी कार का वेंटिलेशन सिस्टम सही तरह से काम कर रहा हो।
क्या खाएं?
- खजूर, किशमिश, सेब, सोंठ, अजवायन, हींग, लहसुन, लौकी, कद्दू, मूंग के अलावा ताजा सब्जियों का सूप पिएं। - सुबह खाने से पहले या खाने के बाद रोज एक आंवला खाएं। - रोजाना एक चम्मच च्यवनप्राश खाएं। - हल्के गुनगुने पानी से नहाएं। - 10 से 15 तुलसी के पत्ते, 1 टुकड़ा अदरक और 10 से 15 पत्ते पुदीने के लें। सबको पीसकर एक गिलास पानी में उबाल लें। जब पानी उबलकर आधा रह जाए तो उसे छान लें और स्वाद के अनुसार शहद मिलकार पिएं। इसे पूरे दिन में दो बार (सुबह खाने के बाद और रात को सोने से पहले) पीने से साइनस में आराम मिलता है।
- खजूर, किशमिश, सेब, सोंठ, अजवायन, हींग, लहसुन, लौकी, कद्दू, मूंग के अलावा ताजा सब्जियों का सूप पिएं। - सुबह खाने से पहले या खाने के बाद रोज एक आंवला खाएं। - रोजाना एक चम्मच च्यवनप्राश खाएं। - हल्के गुनगुने पानी से नहाएं। - 10 से 15 तुलसी के पत्ते, 1 टुकड़ा अदरक और 10 से 15 पत्ते पुदीने के लें। सबको पीसकर एक गिलास पानी में उबाल लें। जब पानी उबलकर आधा रह जाए तो उसे छान लें और स्वाद के अनुसार शहद मिलकार पिएं। इसे पूरे दिन में दो बार (सुबह खाने के बाद और रात को सोने से पहले) पीने से साइनस में आराम मिलता है।
योग में इलाज।
सुबह उठकर 1 से 2 मिनट जल नेति, कुंजल क्रिया 2 से 5 मिनट, कपालभाति 5 से 7 मिनट, महावीर आसन 2 से 3 बार, वीर आसन 2 से 3 बार, पृष्ठचालन आसन 2 से 3 बार, शलभासन 2 से 3 बार, धनुर्रासन 2 से 3 बार, मंडूकासन 2 से 3 बार, लिंग मुद्रा 2 से 3 बार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम 2 से 5 मिनट, भस्त्रिका प्राणायाम 2 से 5 मिनट, इसके बाद 2 से 5 मिनट ध्यान में बैठें या 2 से 5 मिनट तक शवासन करें। पानी को उबालकर ठंडा करके उससे नेति क्रिया करें। नेति क्रिया किसी योग गुरु की देखभाल में दिन में एक बार और एक महीने तक करें। बिना एक्सपर्ट के ना करें। ये सभी योग क्रियाएं सुबह खाली पेट करें और शाम को करना चाहते हैं तो डिनर से 2 से 3 घंटे पहले या लंच के चार घंटे बाद करें।
सुबह उठकर 1 से 2 मिनट जल नेति, कुंजल क्रिया 2 से 5 मिनट, कपालभाति 5 से 7 मिनट, महावीर आसन 2 से 3 बार, वीर आसन 2 से 3 बार, पृष्ठचालन आसन 2 से 3 बार, शलभासन 2 से 3 बार, धनुर्रासन 2 से 3 बार, मंडूकासन 2 से 3 बार, लिंग मुद्रा 2 से 3 बार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम 2 से 5 मिनट, भस्त्रिका प्राणायाम 2 से 5 मिनट, इसके बाद 2 से 5 मिनट ध्यान में बैठें या 2 से 5 मिनट तक शवासन करें। पानी को उबालकर ठंडा करके उससे नेति क्रिया करें। नेति क्रिया किसी योग गुरु की देखभाल में दिन में एक बार और एक महीने तक करें। बिना एक्सपर्ट के ना करें। ये सभी योग क्रियाएं सुबह खाली पेट करें और शाम को करना चाहते हैं तो डिनर से 2 से 3 घंटे पहले या लंच के चार घंटे बाद करें।
क्या ना करे?
बासी खाना, गन्ने का रस, दही, चावल, केला, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, फ्रिज का ठंडा दूध, चॉकलेट, तीखा खाने से बचें। ठंडी हवा में ज्यादा न घूमें या नाक और मुंह को ढककर रखें।
बासी खाना, गन्ने का रस, दही, चावल, केला, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, फ्रिज का ठंडा दूध, चॉकलेट, तीखा खाने से बचें। ठंडी हवा में ज्यादा न घूमें या नाक और मुंह को ढककर रखें।
डिस्क्लेमर : - आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। इन्हें आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक से सलाह जरूर लें। 'Goquora' इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।

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